जब भी दुख और गम की बारिश ,
मेरी जिन्दगी में होती हैं ,
मेरी माँ ही उस वक्त मेरे साथ ,
मुसीबत से लड़ने को खड़ी होती है ,
अगर माँ घर से बाहर हो तो ,
मुझे घर अच्छा नहीं लगता ,
बिना माँ के तो परिंदों के बच्चो को भी ,
घोंसले में अच्छा नहीं लगता ,
ए अँधेरे दूर हो जा मेरी जिन्दगी से तू ,
मेरी माँ की दुआ अँधेरे में भी उजाला करती है ,
मुझे मेरी माँ के सिवा इस दुनिया में हर चीज़ ,
माँ की ममता से कमजोर लगती है। ……
( शिखा की कलम से )
( शिखा की कलम से )