Wednesday, 25 February 2015

मेरी माँ

जब भी दुख और गम की बारिश ,
मेरी जिन्दगी  में  होती हैं ,
मेरी माँ  ही उस वक्त मेरे साथ ,
मुसीबत  से लड़ने को खड़ी  होती है ,
अगर माँ घर से बाहर  हो तो ,
मुझे घर अच्छा नहीं लगता ,
बिना माँ के तो परिंदों के बच्चो को भी ,
घोंसले  में अच्छा नहीं लगता ,
 ए अँधेरे दूर हो जा मेरी जिन्दगी से तू ,
मेरी माँ की दुआ अँधेरे में भी उजाला करती है ,
मुझे मेरी माँ के सिवा इस दुनिया में हर चीज़ ,
माँ की ममता से कमजोर लगती है। ……


                                                           ( शिखा की कलम से )
                                                                             


Friday, 20 February 2015

हम आज की नहीं कल की फ़िक्र करते है

      हम आज  की नहीं कल की फ़िक्र करते हैं  क्योकि हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है हमारी भारतीय सभ्यता आज की नहीं बल्कि उस समय की है जब ये देश ऋषि मुनियो का देश माना जाता था किसी ने इसे भारत कहा  तो किसी ने हिंदुस्तान तो किसी ने इंडिया भी । और आज भी इसे ऋषि मुनियो का देश कहा जाता है हम भारतीय देश विदेश में अपनी संस्कृति के नाम से जाने जाते है क्या कभी किसी ने इस बारे में सोचा है 
     जब हम सुबह सोकर उठते है तो सबसे पहले ईश्वर का नाम लेते है और सभी अच्छे काम के लिए ईश्वर से प्रार्थना  करते है क्या कभी किसी ने इस बारे सोचा है की हम ये सब क्यों करते हैं  कभी  अगर आपको समय मिले तो किसी विद्वान या ज्ञानी से जरूर पूछियेगा 
     आपको इसके जवाब में बहुत सी नयी नयी बाते सुनने को मिलेंगी 

       तब  आप भी कहेंगे  कि  हम आज की नहीं  कल की फ़िक्र करते है 





                                                                                                                    ओम प्रकाश 
                                                                                                           

Thursday, 19 February 2015

कब अायेंगे वो पुराने दिन

मुझे याद है वो बचपन की शरारतें
मुझे याद है वो .....
मुझे याद है वो .....

कब अायेंगे वो पुराने दिन